New zealand mein muslimo par hamla kyun | real think

इस तस्वीर को एक बार ध्यान से देखिए! 👇👇👇

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जब मैने इस तस्वीर को देखा था तो बेहद हैरान हो गया था,—- मैने सोचा कि आज दुनिया Internet और Modern युग मे जी रही है फिर भी ये कौन सी यंग जेनेरेशन है जिसके हाथो मे इस तरह की तस्वीर है………..
ये इज़राईल की वो यगं जेनेरेशन है जिसके हाथ की तख्ती मे लिखा हुआ है ” Khaybar Was Your Last Chance ” ( जंगे खैबर तुम्हारी आखरी जीत थी )!—– और हमारी आज की यंग जेनेरेशन लौडियाबाजी, अय्याशी, सुट्टा गान्जा, Tiktok मे लगी हुई है!—— मै दावे से कह रहा हु आधे से ज्यादा यंग जेनेरशन को खैबर पता नही,वो सोचते होगे कि खैबर किसी चिडिया का नाम है!
यही वजह है कि हमारे सरो पे ज़वाल अभी है, और इससे कई गुना आता हुआ दिख रहा है……
मोहर्रम सात 7 हिजरी मई का महीना 628 ईसवी में मुसलमानों और यहूदियों के बीच यह जंग हुई जिसको खैबर की जंग कहते हैं जिसमें मुसलमान फतेहयाब हुए खैबर यहूदियों का मरकज था जो मदीना से डेढ़ 150 सौ किलोमीटर अरब के शुमाल मग़रिब में था जहां से वह दूसरे यहूदी कबीलों के साथ मुसलमानों के खिलाफ लगातार साजिशें करते रहते थे चुनांचे मुसलमानों ने इस मसले को खत्म करने के लिए एक जंग शुरू की खैबर का किला खास कर उस उसके कई किले यहूदी फौज की ताकत के मरकज थे जो हमेशा मुसलमानों के लिए खतरा बने रहे और मुसलमानों के खिलाफ कई साजिशों में शरीक रहे इन साजिशों में खंदक की जंग और जंगे अहद के दौरान यहूदियों की कार्रवाइयाँ शामिल है इसके अलावा ख़ैबर के यहुद ने कबीला बनी नजीर को भी पनाह दी थी जो मुसलमानों के साथ साजिश और जंग में शामिल थे ख़ैबर के यहूद के ताल्लुकात बनू
करीजा के साथ भी थे जिन्होंने जंगे खंदक में मुसलमानों से वादाखिलाफी करते हुए उन्हें सख्त मुश्किल से दो चार कर दिया था और ख़ैबर वालों ने फ़दक के यहूदियों के अलावा नजद के कबीला बनी गतफान के साथ भी मुसलमानों के खिलाफ मोआहदे किए थे मोहर्रम 7 हिजरी मई 628 ईस्वी में हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने 1600 की फौज के साथ जिनमें से 100 से कुछ ज्यादा घुड़सवार थे खैबर की तरफ जंग की नियत से रवाना हुए और 5 छोटे 2 किले फ़तह करने के बाद ख़ैबर किला का मुहासिरा कर लिया गया जो दुश्मन का सबसे बड़ा और मजबूत किया था एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ था और उसका सुरक्षा का इंतजाम बहुत मजबूत था
यहूदियों ने औरतें और बच्चे एक किला में और सामान खाने पीने के दीगर सारे सामान एक और किला में रख दिया और हर किला पर तीरंदाज खड़े कर दिए जो किला में घुसने कि कोशिश करने वालों पर तीरों की बारिश कर देते थे मुसलमानों ने पहले 5 किलों को एक-एक करके फतह किया जिसमें 50 मुजाहिदीन जख्मी और एक शहीद हुए, यहूदी रात के तारीकी में एक से दूसरे के किले तक अपना माल और सामान और लोगों को मुनतकिल करते रहे बाकी 2 किलों में किला कमूस सबसे बुनियादी और बड़ा था और यह एक पहाड़ी पर बना हुआ था हुजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने बारी-बारी हजरत अबू बकर रजिअल्लाहो अन्हो और हजरत उमर रजि अल्लाह अन्हो और हजरत सअद बिन अबादा
रजिअल्लाहो अन्हो की कयादत में फौज को इस किला को फतह करने के लिए भेजे मगर मुसलमान कामयाब ना हो सके फिर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि कल मैं अलम (फौज में एक झंडा होता था )उसे दूंगा जो अल्लाह और उसके रसूल से मोहब्बत करता है और अल्लाह और उसका रसूल उससे मोहब्बत करते हैं वह शिकस्त खाने वाला और भागने वाला नहीं है खुदा उसके दोनों हाथों से फतह अता करेगा यह सुनकर तमाम सहाबा ख्वाहिश करने लगे कि यह सआदत उन्हें नसीब हो अगले दिन हुजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम हजरत अली रजिअल्लाहो अन्हो को तलब किया सहाबा इकराम ने बताया कि उन्हें आशूब ए चश्म है लेकिन हजरत अली रजिअल्लाहो अन्हो आये तो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना लो आब दहन उनकी आंखों में लगाया जिसके बाद ता ज़िंदगी उन्हें कभी आशूब ए चश्म नहीं हुआ हजरत अली रजिअल्लाहो अन्हो किला पर हमला करने के लिए पहुंचे तो यहूदियों के मशहूर पहलवान और मरहब का भाई मुसलमानों पर हमलावर हुआ मगर हजरत अली रजिअल्लाहो अन्हो ने उसे क़त्ल कर दिया और उसके साथी भाग गए उसके बाद मरहब रजज़ पढ़ता हुआ मैदान में उतरा उसने जिरह बख्तर और खोद पहना हुआ था उसके साथ एक जबरदस्त लड़ाई के दौरान हज़रत अली रजिअल्लाहो अन्हो ने उसके सर पर तलवार का ऐसा वार किया कि उसका खोद और सर दरमियान में से दो टुकड़े हो गया उसके हलाकत पर खौफजदा होकर उसके साथी भागकर किला में पनाह लेने पर मजबूर हो गए हजरत अली रजिअल्लाहो अन्हो ने किला का दरवाजा जो 20 आदमी खोलते थे उसे उखाड़ लिया और उस खंदक पर रख दिया जो यहूदियों ने किला के आस पास खोद रखी थी ताकि कोई किला के अंदर ना आसके,
इस फतेह में 93 यहूदी मौत के घाट उतरे और किला फतह हो गया मुसलमानों को शानदार फतेह नसीब हुई हुजूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने यहूदियों को उनकी ख्वाहिश पर पहले की तरह किला ख़ैबर में रहने की इजाजत दे दी और उनके साथ मुआहदा किया कि वह अपनी आमदनी का आधा हिस्सा बतौर जजिया मुसलमानों को देंगे और मुसलमान जब मुनासिब समझेंगे उन्हें ख़ैबर से निकाल देंगे इस जंग मैं बनी नजीर के सरदार हई बिन अखतब की बेटी सफिया भी कैद हुई जिनको आजाद करके हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वसल्लम ने उनसे निकाह कर लिया
इस जंग से मुसलमानों को एक हद तक यहूदियों की घिनौनी साजिशों से निजात मिल गई और उन्हें मआशी फायदा भी हासिल हुआ इस जंग के बाद बनु नजीर की एक यहूदी औरत ने हुजूर सल्लल्लाहो अलेहे वसल्लम को भेड़ का गोश्त पेश किया जिसमें एक सरी उल सर ज़हर मिला हुआ था हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेहे वसल्लम ने उसे महसूस होने पर थूक दिया कि उसमें जहर है मगर उनके एक सहाबी जो उनके साथ खाने में शरीक थे शहीद हो गए एक सहाबी की रिवायत के मुताबिक बिस्तर वफात पर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि उनकी बीमारी उस जहर का असर है जो ख़ैबर में दिया गया था मुसलमानों को इस जंग से भारी तादाद में जंगी सामान हथियार मिले जिससे मुसलमानों की ताकत बढ़ गई उसके 18 महीने बाद मक्का फतह हुआ उस जंग के बाद हजरत जाफर तैयार हबशा से वापस आए तो हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहे वसल्लम ने फरमाया कि समझ में नहीं आता कि मैं किस बात के लिए ज्यादा खुशी मनाऊं फतेह ख़ैबर के लिए या जाफर (रजिअल्लाहो अन्हो) की वापसी
हवाला : मगाज़ी जिल्द 2 पेज 637
तारीख इब्न कसीर जिल्द 3
इनसाइक्लोपीडिया ऑफ इस्लाम
अल मगाज़ी वाक़दी जिल्द 2 पेज 700
तारीख इब्न कसीर जिल्द 3 पेज 375
अल सीरत नबवियत अज़ इब्न हिशाम पेज 144 ता 149
सहीह बुखारी जिल्द 2 पेज 3

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